टॉप टेन में घूमर

राजस्थान के पारंपरिक व सर्वाधिक लोकप्रिय नृत्य घूमर को विश्व के सर्वोत्कृष्ट 10 स्थानों में से चौथा स्थान मिला है। एक इंटरनेशनल ऑनलाइन ट्रैवल पोर्टल ने दुनिया के सभी नृत्यों को विभिन्न मानदंडों पर परखते हुए ‘‘घूमर‘‘ को चौथा स्थान दिया है। इस कड़ी में यह भारत का एकमात्र नृत्य है। पहले स्थान पर हवाई, दूसरे स्थान पर जापान का बोन ओडोरी और तीसरे स्थान पर आयरलैंड का नृत्य रहा है।

राजस्थान का मशहूर घूमर नृत्य
राजस्थान का मशहूर घूमर नृत्य

‘‘घूमर‘‘ राजस्थान की पारंपरिक नृत्यशैली है जिसमें विभिन्न मांगलिक व खुशी के अवसरों पर महिलाएं श्रृंगारिक नृत्य करती है। मुगलकालीन युग में औरतें पुरुषों से पर्दा करती थीं, लिहाजा यह नृत्य मुंह ढककर होता था। अब तब कमोबेश उसी तरह नृत्य करने की परंपरा चली आ रही है। राजमहलों, सामंतों, राजपूतों के घरों में विशेष रूप से किया जाने वाला यह नृत्य राजपूतों की महिलाओं की अन्य सूबों में शादियों के साथ अनेक स्थानों पर विभिन्न रूपों में प्रचलित हो गया। विशेषत: गणगौर विवाह आदि अवसरों पर यह नृत्य महिलाओं द्वारा स्वान्त: सुखाय किया जाता है। रंग-रंगीले पहनावे और गहनों से लक-दक महिलाएं जब स्त्रियोचित नजाकत के साथ इस नृत्य को करती है तो देखने वाले रोमांचित हो जाते हैैं। कालांतर में यह रजवाड़ों से निकलकर विद्यालयों में सिखाया जाने लगा लेकिन इसके बोलों, तालों व लय में एकरूपता न होने से अनेक रूपों में प्रचलित हो गया। इसी तरह सावन के महीने में मौज-मस्ती में भी घूमर नृत्य खूब किया जाने लगा।

गणतंत्र दिवस परेड और विदेशों में प्रस्तुति से इस नृत्य को प्रचार-प्रसार मिला। राजपथ पर घूमर का प्रदर्शन तीन बार हो चुका है। अमेरिका, कनाडा, सऊदी अरब, जर्मनी, कम्बोडिया, वियतनाम, ब्रिटेन आदि देशों में घूमर के कई शो और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित हो चुके हैैं। इस नृत्य को किए जाने के लिए साज के रूप में नगाड़ा व शहनाई की जरूरत होती थी। यह साज धीरे-धीरे लुप्त होते जा रहे थे। ऐसी स्थिति में नृत्य की विशेषता को देखते हुए इसे फिर से लोकप्रिय बनाने की बहुत कोशिशें हुई हैैं। 1999 में पहला ‘‘घूमर‘‘ अलबम जारी हुआ था। तमाम प्रयासों से घूमर के कई प्रदर्शन हुए, स्कूलों में इसे सिखाने की कोशिशें हुईं। वीणा समूह ने 2006 में जयपुर में राजस्थान विधानसभा के सामने जनपथ पर 2000 महिलाओं द्वारा घूमर नृत्य का अभूतपूर्व आयोजन करवाया। अगले साल 2007 में इसे आगे बढ़ाते हुए जयपुर के त्रिपोलिया दरवाजे को मंच बनाते हुए बड़ी चौपड से छोटी चौपड़ तक 5000 महिलाओं द्वारा 70-70 महिलाओं के 74 गोले बनवाकर नृत्य की अभूतपूर्व प्रस्तुति करवाई गई।

Advertisements

Leave a Reply