पेंचः चलें मोगली से मिलने

पेंच में सैलानियों से बेपरवाह टाइगर
पेंच में सैलानियों से बेपरवाह टाइगर

पेंच टागर रिजर्व में इंदिरा प्रियदर्शिनी पेंच नेशनल पार्क व मोगली पेंच सेंक्चुअरी, दोनों शामिल हैं। यहां बाघ देखने के लिए सबसे शानदार व आकर्षक माहौल है। कहा जाता है कि यहां शाकाहारी जानवरों का सबसे ज्यादा घनत्व है। पार्क मध्य भारत में सतपुड़ा पहाड़ियों के दक्षिणी ढलानों में स्थित है और यह छिंदवाड़ा व स्योनी जिलों के अलावा महाराष्ट्र में नागपुर जिले की सीमाओं को भी छूता है। पेंच नदी इस पार्क को दो हिस्सों में बांटती है और यही इस पार्क की जीवनरेखा भी है।

इस समय जहां टाइगर रिजर्व है, उसका इतिहास बड़ा शानदार रहा है। उसकी प्राकृतिक संपदा का जिक्र आइने-अकबरी तक में मिलता है। प्राकृतिक इतिहास की अन्य कई किताबों में भी इसका बखूबी जिक्र है। आर.ए. स्ट्रैंडेल की आत्मकथात्मक किताब ‘स्योनी’ ही दरअसल रुडयार्ड किपलिंग की जंगल बुक की प्रेरणा थी। मोगली की याद है न! और बघेरा व शेर खान! किपलिंग को अपनी यादगार किताब लिखने के लिए प्रेरणा पेंच के इन शानदार जंगलों से ही मिली थी जो प्रकृति की विविधता से भरे हैं। कहा जाता है कि  मोगली का पात्र सर विलियम हेनरी स्लीमैन की पुस्तिका- एन अकाउंट आफ वुल्फस: नर्चरिंग चिल्ड्रेन इन देअर डेन्स– से लिया था, जिसमें कहा गया है कि 1831 में स्योनी जनपद के संत बावड़ी गांव के निकट भेडिय़ा-बालक पकड़ा गया था। द जंगल बुक में जिन जगहों का जिक्र मिलता है वे ज्यादातर स्योनी जनपद की असली जगहें हैं। इनमें वैनगंगा नदी की तंगघाटी भी है जहां शेर खॉं मारा गया था।

पेंच में बाकी जानवरों की भी बहुतायत है
पेंच में बाकी जानवरों की भी बहुतायत है

अनूठे आकर्षणः लगभग 1200 से ज्यादा वनस्पति प्रजातियों के लिए मशहूर इस पार्क में वन्य जंतुओं का अनूठा संसार बसा है। पेंच बाघों का प्रिय स्थल है क्योंकि यहां चीतल व सांभर जैसे जानवरों की बहुतायत है, जो बाघों व तेंदुओं का भोजन हैं। यह क्षेत्र मुख्यतया गौर (इण्डियन बायसन), चीतल, सांभर, नीलगाय, जंगली कुत्तों और जंगली सुअरों के लिए जाना जाता है। इसके अतिरिक्त यहां स्लॉथ बीयर, चौसिंघा, चिंकारा, बारहसिंघा, सियार, लोमड़ी, जंगली बिल्ली, सीवेत, लकड़बग्घा और साही जैसे वन्यजीव भी हैं। पक्षियों के विविध प्रकारों के लिए भी पेंच का कोई जवाब नहीं है। मालाबार हार्नबिल, मछारंग व गरूड़ के साथ ही यहां 285 से भी ज्यादा  देशी व प्रवासी परिंदों की प्रजातियां पाई जाती है।

जंगल सफारीः जीप सफारी पेंच का खास आकर्षण है। भोर में भोजन व पानी की तलाश में खुले में निकले जंगली जानवरों को देखना वास्तव में यादगार अनुभव है। पार्क में सैलानियों को हाथियों की सवारी बाघों को देखने के लिए कराई जाती है जिसका अपना अलग ही आनंद है। पेंच नदी में बोटिंग व राफ्टिंग की भी सुविधा है।

कैसे पहुंचें

टाइगर का ऐसा नजारा हो तो क्या बात है। फोटोः मध्य प्रदेश टूरिज्म
टाइगर का ऐसा नजारा हो तो क्या बात है। फोटोः मध्य प्रदेश टूरिज्म

सड़क मार्ग: नागपुर-जबलपुर राजमार्ग पर स्थित पेंच के लिए विभिन्न शहरों जैसे छिंदवाड़ा (120 किमी) और स्योनी (60 किमी) से टैक्सियां उपलब्ध है। नागपुर से पेंच के लिए बस खवासा तक पहुंचाती है जो पेंच के तूरिया गेट से लगभग 12 किमी दूर है।

रेल मार्ग: नागपुर यहां का निकटतम रेलवे स्टेशन है जो पूरे देश से जुड़ा है। जबलपुर भी बड़ा रेल जंक्शन है जहां से 4-5 घंटे की ड्राइव के बाद पेंच पहुंच सकते हैं।

वायु मार्ग: नागपुर (92 किमी) और जबलपुर (200 किमी) यहां के निकटवर्ती हवाई-अड्डे हैं।

कहां ठहरेः मध्य प्रदेश पर्यटन द्वारा संचालित तूरिया गेट (खवासा) स्थित किपलिंग्स कोर्ट और खवासा से लगभग 21 किमी दूर रूखड़ स्थित हाइवे ट्रीट होटल, अन्य होटल, टूरिस्ट लॉज और गेस्ट हाउस।

कब जाएः अक्टूबर से जून। वैसे भी पेंच राष्ट्रीय पार्क 1 जुलाई से 30 सितंबर तक बंद रहता है। तय शुल्क देकर और गाइड साथ लेकर पार्क  में प्रवेश सुबह 6 से 11 बजे और दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक होता है।

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